Mahashivratri 2023 Live: आज है महाशिवरात्रि 2023, जाने शुभ मुहूर्त और पूजा की सही विधि; आज 18 फरवरी 2023 को महाशिवरात्रि का महापर्व है। इस दिन भगवान शिव-मां पार्वती की पूजा की जाती है। कई सालों में पहली बार शिव पूजा का संयोग बना है।
महाशिवरात्रि 2023 पर बेहद दुर्लभ संयोग बना है –
महाशिवरात्रि पर शनि, सूर्य और चंद्रमा का विशेष संयोग बन रहा है। यह त्रिग्रही योग शनि, सूर्य और चंद्रमा के कुंभ राशि में मिलने से बनेगा। साथ ही महाशिवरात्रि पर शनि प्रदोष व्रत का भी शुभ संयोग बन रहा है। अगर आपकी राशि में शनि है तो इस खास दिन कुछ उपाय करके आप राहत पा सकते हैं। महाशिवरात्रि पर जल में काले तिल मिलाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करना चाहिए। इससे साढ़ेसाती का दुष्प्रभाव कम होगा।
Mahashivratri 2023 Live
महाशिवरात्रि की पूजा करते समय ध्यान रखें – भगवान शिव को जल अर्पित करते समय लोहे या स्टील के बर्तनों का प्रयोग न करें। इसके स्थान पर पीतल, चांदी या भैंस के दूध का प्रयोग करें। भगवान शिव की पूजा में हल्दी, लाल फूल, केतकी या केवड़े के फूल या कुमकुम न चढ़ाएं। ऐसा करने से आपको पूजा का लाभ मिलेगा।
शिवलिंग परिक्रमा से जुड़े नियम – शिवलिंग की पूरी परिक्रमा की जाती है, लेकिन एक विधान के कारण कुछ लोग इसकी जगह आधा चक्कर लगाते हैं। अर्धवृत्त पूर्ण वृत्त के विपरीत दिशा में जाता है। शिवलिंग की परिक्रमा करते समय विशेष रूप से सावधान रहें कि आप किस दिशा में जा रहे हैं – इस धर्म की पूजा में इसका विशेष महत्व है। जब आप अनुष्ठान कर रहे हों तो जलाशय से न चलें। यह दुर्भाग्य है।
शिवरात्रि में भोग लगाने वाला प्रसाद – महाशिवरात्रि पर, आप भगवान भोले भंडारी को गुड़ से बनी मिठाई, साथ ही कच्चे चने से बने हलवे का भोग लगा सकते हैं। आप भोलेनाथ को कच्चे चने से बनी खीर या चावल की खीर भी चढ़ा सकते हैंऔरआप इस विशेष दिन पर भगवान शिव को लस्सी शेक भी चढ़ा सकते हैं
रात्रि जागरण – महाशिवरात्रि पर लोग पूरे दिन भगवान शिव की पूजा करते हैं। हालांकि, रात और दिन के बीच, सूर्यास्त के बाद, लोगों का मानना है कि भगवान शिव वास्तव में खुश हैं और उनकी मनोकामना पूरी करने में उनकी मदद करेंगे। इसलिए लोग पूरी रात उनकी पूजा में बिताते हैं।
महाशिवरात्रि 2023 महत्त्व

महाशिवरात्रि का महत्व – महाशिवरात्रि का दिन शिव भक्तों के लिए खास होता है। इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान शंकर की विशेष पूजा करते हैं। यह व्रत स्त्रियों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है और कहा जाता है कि इसी दिन भोलेनाथ का विवाह माता पार्वती के साथ हुआ था। यह भी माना जाता है कि महाशिवरात्रि का व्रत करने से अविवाहित महिलाओं का विवाह जल्दी होता है, वहीं विवाहित महिलाएं अपने पति के लिए सुखी जीवन सुनिश्चित करने के लिए व्रत रखती हैं।
सरल विधि पूजा – पंडित सुरेश श्रीमाली का कहना है कि महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की लंबी पूजा-अर्चना या हवन-अनुष्ठान करने की जरूरत नहीं है। भगवान शिव को खुश करने का एक ही उपाय है कि ॐ नमः शिवाय का जाप करें और शिवलिंग पर बिल्व पत्र चढ़ाएं
यदि आपके पास किसी के प्रति या किसी चीज के प्रति आस्था, भक्ति और निष्ठा है, तो आपकी मनोकामना जल्द ही पूरी होगी, क्योंकि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी पर चंद्रमा और सूर्य एक दूसरे के करीब होते हैं, जो एक बहुत ही शक्तिशाली योग योग बनाता है। यह सफलता प्राप्त करने के लिए एक अच्छा समय बनाता है।
आज कई शुभ योग – पंडित सुरेश श्रीमाली का कहना है कि इस साल महाशिवरात्रि पर कुछ दुर्लभ संयोग बन रहे हैं और महाशिवरात्रि के दिन शनि प्रदोष व्रत भी है। इसके अलावा, शाम 5:41 बजे के बाद किए जाने वाले योग अभ्यासों का एक विशेष संयोजन है। इन अभ्यासों को करने से आपको सामान्य से अधिक सफलता मिलेगी।
महाशिवरात्रि 2023 पूजन सामग्री
बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र और सफेद चंदन सभी धार्मिक समारोहों में उपयोग की जाने वाली सामग्री हैं। पंच मेवा एक प्रकार का फल है जिसमें पांच अलग-अलग प्रकार के फल शामिल होते हैं। इनमें गेहूं, काले तिल, अरहर की दाल, अक्षत और मूंग शामिल हैं। पंचामृत गाय के दूध, दही, शहद और चीनी का मिश्रण है। इसका उपयोग धार्मिक समारोहों में किया जाता है।
भस्म, भांग, केसर, रुद्राक्ष, और मौली सभी धार्मिक समारोहों में उपयोग की जाने वाली सामग्री हैं। अबीर, गुलाल, भोडल और कपूर सभी धार्मिक समारोहों में उपयोग की जाने वाली सामग्रियां हैं। शिव मुठ्ठी एक धार्मिक त्योहार है जिसमें गेहूं, काले तिल, अरहर की दाल, अक्षत और मूंग शामिल हैं।
सुहाग सामग्री एक प्रकार का भोजन है जिसका उपयोग महाशिवरात्रि के हिंदू त्योहार को मनाने के लिए किया जाता है। शिवलिंग एक प्रकार का पुष्प है। उनकी पाँच पंखुड़ियाँ होती हैं और आमतौर पर बैंगनी या सफेद होती हैं। कुश हिंदू धर्म में एक देवता हैं। उनका आसन आकाश में है। लोग उनसे आशीर्वाद मांगने के लिए प्रसाद चढ़ाते हैं। सुपारी, लौंग, इलायची, सुपारी, और भांग सभी धार्मिक समारोहों में उपयोग की जाने वाली सामग्री हैं।
ये चीज़े महाशिवरात्रि 2023 के दिन शिवलिंग में न चढ़ाएं
आप अभिषेक कर रहे हों तो हल्दी का तिलक लगाना, तुलसी दल अर्पित करना, सिंदूर या कुमकुम लगाना, शंख से जल देना या लोहे या स्टील के बर्तन का उपयोग करना ये चीजें करने से बचें।
शिवलिंग पर चढ़ाएं ये सामग्री
- मेष राशि: बेलपत्र अर्पित करें
- वृष राशि: दूध मिश्रित जल चढ़ाएं
- मिथुन राशि: दही मिश्रित जल चढ़ाएं
- कर्क राशि: चंदन का इत्र अर्पित करें
- सिंह राशि: घी का दीपक जलाएं
- कन्या राशि: काला तिल और जल मिलाकर अभिषेक करें
- तुला राशि: जल में सफेद चंदन मिलाएं
- वृश्चिक राशि: जल और बेलपत्र चढ़ाएं
- धनु राशि: अबीर या गुलाल चढ़ाएं
- मकर राशि: भांग और धतूरा चढ़ाएं
- कुंभ राशि: पुष्प चढ़ाएं
- मीन राशि: गन्ने के रस और केसर से अभिषेक करें
महाशिवरात्रि 2023: पूजा की विधि
पूजा विधि – महाशिवरात्रि पर जल्दी उठकर स्नान करले और साफ कपड़े पहनना भी अच्छा होता है। इन मूल बातों का ध्यान रखने के बाद शिव मंदिर जाएं और शिवलिंग का पवित्र जल, गन्ने के रस, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें। आप शिवलिंग पर चंदन का लेप भी लगा सकते हैं। ऐसा करने के बाद भगवान को बेलपत्र, भांग, धतूरा, फल, मिठाई और अन्य चीजें अर्पित करें। इसके बाद शिव चालीसा का पाठ करें और भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। अंत में भगवान शिव की आरती गाएं।
महाशिवरात्रि 2023 पूजा का शुभ मुहर्त
- 18 फरवरी शाम 06:45 से 09:35 तक
- 18 फरवरी रात 09:35 से 12:24 तक
- 18-19 फरवरी रात 12:24 से 03:14 तक
- 19 फरवरी सुबह 03:14 से06:03 तक
राशि के अनुसार महाशिवरात्रि के दौरान विशेष मंत्रों का जाप करना चाहिए:
महाशिवरात्रि के इस महान अवसर पर इन मंत्रोका करे जाप और शिव जी को करे प्रसन्न:-
वृषभ – ॐ त्रिनेत्राय नम:
कर्क – ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः
सिंह – ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्
कन्या – ऊं नमः शिवाय
तुला – ॐ ज्ञानभूताय नम:
वृश्चिक – ऊं व्योमात्मने नम:
धनु – ॐ ईशानाय नम:
मकर -ॐ श्रीकंठाय नम:
कुंभ – ॐ अनंतधर्माय नम:
मीन – ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नम:
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महाशिवरात्रि 2023 से जुड़े कुछ सवाल और उनके जवाब
महाशिवरात्रि 2023 कब है?
आज 18 फरवरी 2023 को महाशिवरात्रि का महापर्व है। इस दिन भगवान शिव-मां पार्वती की पूजा की जाती है। कई सालों में पहली बार शिव पूजा का संयोग बना है।
महाशिवरात्रि 2023 की पूजा करते समय किन किन बाते का विशेष ध्यान रखना चाहिए?
महाशिवरात्रि की पूजा करते समय ध्यान रखें – भगवान शिव को जल अर्पित करते समय लोहे या स्टील के बर्तनों का प्रयोग न करें। इसके स्थान पर पीतल, चांदी या भैंस के दूध का प्रयोग करें। भगवान शिव की पूजा में हल्दी, लाल फूल, केतकी या केवड़े के फूल या कुमकुम न चढ़ाएं। ऐसा करने से आपको पूजा का लाभ मिलेगा।
महाशिवरात्रि के दिन कौनसी चीज़े शिवलिंग पर नही चढ़ानी चाहिए?
ये चीज़े महाशिवरात्रि 2023 के दिन शिवलिंग में न चढ़ाएं:
आप अभिषेक कर रहे हों तो हल्दी का तिलक लगाना, तुलसी दल अर्पित करना, सिंदूर या कुमकुम लगाना, शंख से जल देना या लोहे या स्टील के बर्तन का उपयोग करना ये चीजें करने से बचें।
महाशिवरात्रि की पूजा के लिए पूजा की सामग्री क्या है?
बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र और सफेद चंदन सभी धार्मिक समारोहों में उपयोग की जाने वाली सामग्री हैं। पंच मेवा एक प्रकार का फल है जिसमें पांच अलग-अलग प्रकार के फल शामिल होते हैं। इनमें गेहूं, काले तिल, अरहर की दाल, अक्षत और मूंग शामिल हैं। पंचामृत गाय के दूध, दही, शहद और चीनी का मिश्रण है। और अधिक विस्तृत जानकारी उपर इस पोस्ट में दी गयी है l
महाशिवरात्रि की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या है?
महाशिवरात्रि 2023 पूजा का शुभ मुहर्त
18 फरवरी शाम 06:45 से 09:35 तक
18 फरवरी रात 09:35 से 12:24 तक
18-19 फरवरी रात 12:24 से 03:14 तक
19 फरवरी सुबह 03:14 से06:03 तक
महाशिवरात्रि का क्या महत्त्व है?
महाशिवरात्रि का महत्व – महाशिवरात्रि का दिन शिव भक्तों के लिए खास होता है। इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान शंकर की विशेष पूजा करते हैं। यह व्रत स्त्रियों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है और कहा जाता है कि इसी दिन भोलेनाथ का विवाह माता पार्वती के साथ हुआ था। यह भी माना जाता है कि महाशिवरात्रि का व्रत करने से अविवाहित महिलाओं का विवाह जल्दी होता है, वहीं विवाहित महिलाएं अपने पति के लिए सुखी जीवन सुनिश्चित करने के लिए व्रत रखती हैं।